Why Do Some People Wake Up During Surgery? – Real Terrifying Cases

Why Do Some People Wake Up During Surgery – Real Terrifying Cases

सर्जरी के दौरान कुछ लोग होश में क्यों जाते हैं? – डरावने असली मामले जो रोंगटे खड़े कर देते हैं

कल्पना कीजिए कि आप ऑपरेशन टेबल पर लेटे हैं। डॉक्टर ने कहा है कि आप पूरी तरह बेहोश हो जाएंगे और कुछ भी महसूस नहीं होगा। आपकी आंखें बंद होती हैं, लेकिन अचानक आपको आवाज़ें सुनाई देने लगती हैं। आप दर्द महसूस कर रहे हैं, शरीर को हिलाना चाहते हैं, चीखना चाहते हैं—लेकिन आपका शरीर बिल्कुल जड़ हो चुका है। आप जाग रहे हैं, सब कुछ महसूस कर रहे हैं, लेकिन किसी को बता नहीं पा रहे। यह किसी हॉरर फिल्म का सीन नहीं, बल्कि एक वास्तविक और मेडिकल साइंस से जुड़ा डरावना सच है, जिसे कहा जाता है Anesthesia Awareness

एनेस्थीसिया क्या होता है और इसका काम क्या है

एनेस्थीसिया वह दवा होती है, जो सर्जरी के दौरान मरीज को दर्द से बचाने और बेहोश करने के लिए दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है कि मरीज न तो दर्द महसूस करे, न ही ऑपरेशन की कोई याद उसके दिमाग में दर्ज हो। सामान्य तौर पर एनेस्थीसिया तीन स्तरों पर काम करता है—बेहोशी, दर्द नियंत्रण और मांसपेशियों को ढीला करना। ज़्यादातर मामलों में यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित होती है।

एनेस्थीसिया अवेयरनेस क्या है

एनेस्थीसिया अवेयरनेस वह स्थिति है, जब मरीज सर्जरी के दौरान आंशिक या पूरी तरह होश में आ जाता है। इस दौरान वह आवाज़ें सुन सकता है, दबाव या दर्द महसूस कर सकता है, लेकिन मांसपेशियों को ढीला करने वाली दवाओं के कारण वह हिल नहीं सकता और न ही बोल सकता है। यही कारण है कि यह अनुभव मानसिक रूप से बेहद भयावह होता है।

यह कितना दुर्लभ है

मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, एनेस्थीसिया अवेयरनेस लगभग हर 15,000 से 20,000 सर्जरी में से एक में होती है। यह संख्या भले ही कम लगे, लेकिन जब यह किसी के साथ होता है, तो उसका असर जीवनभर रह सकता है। कुछ मामलों में मरीजों को बाद में PTSD यानी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर तक हो जाता है।

सर्जरी के दौरान जागने के असली मामले

दुनिया भर से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ मरीजों ने बताया कि वे ऑपरेशन के दौरान जाग रहे थे। एक महिला ने बताया कि वह डॉक्टरों की बातचीत सुन रही थी, स्केलपल की आवाज़ महसूस कर रही थी और दर्द भी हो रहा था, लेकिन वह न तो आंख खोल पा रही थी और न ही आवाज़ निकाल पा रही थी। ऑपरेशन के बाद उसे महीनों तक नींद नहीं आई और वह बार-बार उसी डरावने अनुभव को याद करती रही।

मरीज कुछ कह क्यों नहीं पाते

सर्जरी के दौरान अक्सर मरीज को muscle relaxants दी जाती हैं, जिससे शरीर की मांसपेशियाँ पूरी तरह शिथिल हो जाती हैं। इसका मतलब यह है कि भले ही दिमाग जाग रहा हो, शरीर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। यही वजह है कि मरीज न तो हिल सकता है, न इशारा कर सकता है और न ही बोल सकता है। यह स्थिति मानसिक रूप से बेहद घातक हो सकती है।

एनेस्थीसिया सही तरह से काम क्यों नहीं करता

इसके कई कारण हो सकते हैं। कभी-कभी दवा की मात्रा मरीज के शरीर के अनुसार पर्याप्त नहीं होती। कुछ मरीजों का शरीर दवाओं को जल्दी मेटाबोलाइज़ कर लेता है, जिससे एनेस्थीसिया का असर कम हो जाता है। इसके अलावा, आपातकालीन सर्जरी में डॉक्टर जानबूझकर कम एनेस्थीसिया देते हैं, ताकि मरीज का जीवन खतरे में न पड़े।

किन सर्जरी में जोखिम ज़्यादा होता है

हार्ट सर्जरी, ट्रॉमा सर्जरी और सी-सेक्शन जैसी सर्जरी में एनेस्थीसिया अवेयरनेस का खतरा थोड़ा ज़्यादा माना जाता है। इसका कारण यह है कि इन मामलों में मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को एनेस्थीसिया की मात्रा सीमित रखनी पड़ती है। इसके अलावा, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में भी जोखिम बढ़ सकता है।

क्या मरीज दर्द महसूस करता है

हर मामले में दर्द का स्तर अलग-अलग होता है। कुछ मरीजों को केवल दबाव या खिंचाव महसूस होता है, जबकि कुछ को तेज़ दर्द भी हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दर्द निवारक दवाएँ कितनी प्रभावी थीं और सर्जरी किस प्रकार की थी।

सर्जरी के बाद यादें क्यों रह जाती हैं

आमतौर पर एनेस्थीसिया में ऐसी दवाएँ होती हैं, जो याददाश्त को भी प्रभावित करती हैं। लेकिन एनेस्थीसिया अवेयरनेस के मामलों में ये दवाएँ पूरी तरह काम नहीं कर पातीं। नतीजतन, मरीज को सर्जरी के दौरान की घटनाएँ याद रह जाती हैं, जो बाद में मानसिक आघात का कारण बनती हैं।

मानसिक प्रभाव और PTSD

कई मरीजों में इस अनुभव के बाद चिंता, डर, अवसाद और PTSD जैसे लक्षण देखे गए हैं। कुछ लोग अस्पताल या डॉक्टर के नाम से ही डरने लगते हैं। उन्हें बार-बार वही दृश्य सपनों में दिखाई देता है। यह अनुभव शारीरिक से ज़्यादा मानसिक चोट छोड़ता है।

डॉक्टर इस खतरे को कैसे कम करते हैं

आजकल आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जो दिमाग की गतिविधियों को मापकर यह संकेत देते हैं कि मरीज कितनी गहराई में बेहोश है। BIS मॉनिटर जैसे उपकरण डॉक्टरों को यह समझने में मदद करते हैं कि एनेस्थीसिया का स्तर पर्याप्त है या नहीं।

क्या मरीज को पहले से चेतावनी दी जाती है

अधिकांश मामलों में डॉक्टर सर्जरी से पहले मरीज को एनेस्थीसिया अवेयरनेस के बारे में नहीं बताते, क्योंकि यह बहुत दुर्लभ है और अनावश्यक डर पैदा कर सकता है। लेकिन हाई-रिस्क सर्जरी में इस संभावना पर चर्चा की जाती है।

क्या भविष्य में यह समस्या खत्म हो जाएगी

वैज्ञानिक और डॉक्टर लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं कि एनेस्थीसिया को और सुरक्षित बनाया जा सके। AI-आधारित मॉनिटरिंग, बेहतर दवाएँ और व्यक्तिगत डोज़िंग सिस्टम भविष्य में इस खतरे को और कम कर सकते हैं। हालांकि इसे पूरी तरह खत्म कर पाना शायद संभव न हो।

क्या यह मेडिकल लापरवाही है

हर एनेस्थीसिया अवेयरनेस का मामला लापरवाही नहीं होता। कई बार यह शरीर की प्रतिक्रिया या आपातकालीन परिस्थितियों का नतीजा होता है। लेकिन कुछ मामलों में गलत डोज़ या मॉनिटरिंग की कमी भी कारण बन सकती है।

मरीज क्या कर सकते हैं

अगर किसी मरीज को सर्जरी के दौरान कुछ भी असामान्य महसूस हुआ हो, तो उसे बाद में डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। यह न केवल उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को समझने और रोकने में भी मदद करता है।

विज्ञान की सीमाएँ और इंसानी डर

एनेस्थीसिया अवेयरनेस हमें यह याद दिलाती है कि आधुनिक चिकित्सा ने भले ही बहुत प्रगति कर ली हो, लेकिन इंसानी शरीर और दिमाग अभी भी पूरी तरह समझे नहीं गए हैं। कुछ अनुभव ऐसे होते हैं, जो विज्ञान की सीमाओं को उजागर करते हैं।

निष्कर्ष: डरावना लेकिन सच्चा पहलू

सर्जरी के दौरान जाग जाना एक दुर्लभ लेकिन बेहद डरावना अनुभव है। यह हमें बताता है कि चिकित्सा विज्ञान में भरोसा ज़रूरी है, लेकिन सतर्कता उससे भी ज़्यादा। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ेगी, उम्मीद है कि ऐसे मामलों की संख्या और भी कम होगी। लेकिन तब तक, यह रहस्य और डर दोनों बना रहेगा।

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