The Great Green Wall: Africa’s Ambitious Plan to Combat Desertification

The Great Green Wall Africas Ambitious Plan to Combat Desertification

ग्रेट ग्रीन वॉल: अफ्रीका की वह महायोजना जो रेगिस्तान को हरियाली में बदलना चाहती है

कल्पना कीजिए एक ऐसी दीवार की, जो ईंट या सीमेंट से नहीं, बल्कि पेड़ों, घास, मिट्टी और जीवन से बनी हो। एक ऐसी दीवार जो किसी देश को नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप को बचाने के लिए खड़ी की जा रही हो। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि अफ्रीका में चल रही एक वास्तविक और ऐतिहासिक पहल है— ग्रेट ग्रीन वॉल (The Great Green Wall)

यह परियोजना अफ्रीका के सहेल (Sahel) क्षेत्र में फैलते रेगिस्तान को रोकने, सूखी ज़मीन को फिर से उपजाऊ बनाने और करोड़ों लोगों को आजीविका देने की एक महत्वाकांक्षी कोशिश है।


सहेल क्षेत्र: जहाँ हरियाली मर रही थी

सहेल अफ्रीका का वह क्षेत्र है जो सहारा रेगिस्तान और उप-सहारा अफ्रीका के बीच स्थित है। यह इलाका सेनेगल से लेकर जिबूती तक लगभग 8,000 किलोमीटर में फैला हुआ है।

पिछले कुछ दशकों में यहाँ:

  • वर्षा में भारी गिरावट
  • मिट्टी का कटाव
  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
  • जलवायु परिवर्तन

ने इस क्षेत्र को धीरे-धीरे बंजर बना दिया।


रेगिस्तान का बढ़ता खतरा

सहारा रेगिस्तान हर साल दक्षिण की ओर बढ़ रहा है। अनुमान है कि हर वर्ष लाखों हेक्टेयर उपजाऊ ज़मीन रेगिस्तान में बदल जाती है।

इसका असर सिर्फ पर्यावरण पर नहीं, बल्कि:

  • खाद्य सुरक्षा
  • रोजगार
  • सामाजिक स्थिरता
  • और शांति

पर भी पड़ता है।


ग्रेट ग्रीन वॉल क्या है

ग्रेट ग्रीन वॉल एक विशाल पर्यावरणीय परियोजना है, जिसका लक्ष्य अफ्रीका में एक 8,000 किलोमीटर लंबी और 15 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी बनाना है।

इसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को पुनर्जीवित करना है।


कब और क्यों शुरू हुई यह योजना

इस योजना की औपचारिक शुरुआत 2007 में अफ्रीकी संघ (African Union) के नेतृत्व में हुई।

मुख्य लक्ष्य थे:

  • रेगिस्तान के फैलाव को रोकना
  • सूखी भूमि को पुनर्जीवित करना
  • स्थानीय समुदायों को रोजगार देना
  • जलवायु परिवर्तन से लड़ना

कितने देश हैं शामिल

ग्रेट ग्रीन वॉल में अफ्रीका के 11 से अधिक देश शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • सेनेगल
  • माली
  • बुर्किना फासो
  • नाइजर
  • नाइजीरिया
  • चाड
  • सूडान
  • इथियोपिया

हर देश अपनी ज़मीन और परिस्थितियों के अनुसार इस परियोजना को लागू कर रहा है।


सिर्फ पेड़ नहीं, पूरा समाधान

शुरुआत में इस परियोजना को सिर्फ “पेड़ लगाने” की योजना माना गया, लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि समस्या कहीं ज़्यादा जटिल है।

इसलिए अब यह योजना शामिल करती है:

  • स्थानीय प्रजातियों के पौधे
  • जल-संरक्षण तकनीक
  • मिट्टी सुधार
  • कृषि-पुनर्जीवन
  • पशुपालन

अरबों पेड़ों का लक्ष्य

इस परियोजना का लक्ष्य अरबों पेड़ लगाना है, लेकिन बिना सोचे-समझे नहीं। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार पेड़ों का चयन किया जाता है।

इससे:

  • मिट्टी में नमी लौटती है
  • कार्बन अवशोषण बढ़ता है
  • जैव विविधता वापस आती है

किसानों और ग्रामीणों की भूमिका

ग्रेट ग्रीन वॉल की आत्मा स्थानीय लोग हैं। किसान, महिलाएँ और युवा इस परियोजना के केंद्र में हैं।

उन्हें:

  • प्रशिक्षण दिया जाता है
  • बीज और संसाधन मिलते हैं
  • स्थायी कृषि तकनीक सिखाई जाती है

रोजगार और आजीविका का नया स्रोत

इस परियोजना से अब तक लाखों लोगों को रोजगार मिला है।

लोग अब:

  • खेती कर पा रहे हैं
  • फल और लकड़ी बेच रहे हैं
  • मधुमक्खी पालन कर रहे हैं

इससे पलायन और गरीबी में कमी आई है।


महिलाओं के जीवन में बदलाव

ग्रेट ग्रीन वॉल ने खासकर महिलाओं के जीवन को बदला है। कई क्षेत्रों में महिलाएँ अब:

  • स्वयं सहायता समूह चला रही हैं
  • आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं
  • अपने समुदाय की नेता बन रही हैं

जलवायु परिवर्तन से लड़ाई

यह परियोजना जलवायु परिवर्तन से लड़ने का एक बड़ा हथियार है। पेड़:

  • कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं
  • तापमान को नियंत्रित करते हैं
  • वर्षा चक्र को सुधारते हैं

अनुमान है कि ग्रेट ग्रीन वॉल 250 मिलियन टन कार्बन को अवशोषित कर सकती है।


अब तक की उपलब्धियाँ

अब तक:

  • लाखों हेक्टेयर भूमि बहाल की जा चुकी है
  • करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं
  • कई बंजर इलाके फिर से हरे हो रहे हैं

कुछ क्षेत्रों में खेती वापस लौट आई है।


चुनौतियाँ अब भी बड़ी हैं

इतनी बड़ी परियोजना में चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं:

  • फंडिंग की कमी
  • राजनीतिक अस्थिरता
  • आतंकवाद और संघर्ष
  • जल संकट

इन समस्याओं ने कई जगह काम की रफ्तार धीमी की है।


अंतरराष्ट्रीय समर्थन

संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और कई अन्य संगठन इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं।

2021 में वैश्विक नेताओं ने इसके लिए अरबों डॉलर की सहायता का वादा किया।


क्या यह योजना सफल होगी

विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रेट ग्रीन वॉल पूरी तरह सफल तभी होगी जब:

  • स्थानीय समुदाय केंद्र में रहें
  • दीर्घकालिक फंडिंग मिले
  • राजनीतिक इच्छाशक्ति बनी रहे

यह कोई एक पीढ़ी का काम नहीं, बल्कि दशकों की प्रक्रिया है।


पूरी दुनिया के लिए सबक

ग्रेट ग्रीन वॉल सिर्फ अफ्रीका के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है।

यह दिखाती है कि:

  • प्रकृति को ठीक किया जा सकता है
  • मानव और पर्यावरण साथ रह सकते हैं
  • बड़े संकटों का समाधान संभव है

भारत और दुनिया के लिए सीख

भारत जैसे देशों के लिए यह परियोजना प्रेरणा है, जहाँ मरुस्थलीकरण और जल संकट बढ़ रहा है।

स्थानीय समाधान, सामुदायिक भागीदारी और दीर्घकालिक सोच—यही इसका मूल मंत्र है।


भविष्य की उम्मीद

अगर यह परियोजना अपने लक्ष्यों को पूरा कर लेती है, तो यह:

  • 10 करोड़ लोगों को फायदा पहुँचाएगी
  • खाद्य सुरक्षा बढ़ाएगी
  • अफ्रीका के भविष्य को बदल देगी

निष्कर्ष: हरियाली की दीवार, उम्मीद की दीवार

ग्रेट ग्रीन वॉल सिर्फ पेड़ों की कतार नहीं है। यह उम्मीद, संघर्ष और मानव संकल्प की कहानी है।

जहाँ कभी रेत आगे बढ़ रही थी, वहाँ अब हरियाली लौट रही है।

यह दीवार हमें सिखाती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो इंसान रेगिस्तान को भी हरा कर सकता है।

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