The Geopolitics of Lithium: India’s Quest for EV Battery Dominance

The Geopolitics of Lithium Indias Quest for EV Battery Dominance

लिथियम की जियोपॉलिटिक्स: EV बैटरी वर्चस्व की दौड़ में भारत की रणनीतिक जंग

आज की दुनिया में तेल और गैस से भी ज्यादा रणनीतिक महत्व जिस खनिज का हो गया है, वह है लिथियम। यही लिथियम इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), स्मार्टफोन, लैपटॉप, ड्रोन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की रीढ़ है। जिस देश के पास लिथियम की सुरक्षित और सस्ती आपूर्ति होगी, वही भविष्य की टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रखेगा।

ऐसे में भारत की लिथियम को लेकर बढ़ती गतिविधियाँ सिर्फ औद्योगिक नहीं, बल्कि भूराजनीतिक (Geopolitical) महत्व भी रखती हैं।


लिथियम क्यों बन गया है नयासफेद सोना

लिथियम को आज “White Gold” कहा जाने लगा है। इसका कारण है इसकी बढ़ती मांग और सीमित उपलब्धता। EV क्रांति के साथ ही दुनिया भर में लिथियम-आयन बैटरियों की मांग तेजी से बढ़ी है।

एक इलेक्ट्रिक कार की बैटरी में औसतन 8 से 10 किलो लिथियम लगता है। जैसे-जैसे पेट्रोल और डीज़ल से दूरी बढ़ेगी, वैसे-वैसे लिथियम की भूख भी बढ़ती जाएगी।


EV युग और बैटरी का वर्चस्व

EV केवल वाहन नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की ऊर्जा प्रणाली का हिस्सा हैं। बैटरी ही EV की सबसे महंगी और सबसे अहम इकाई होती है।

आज जो देश बैटरी टेक्नोलॉजी और कच्चे माल पर नियंत्रण रखते हैं, वही EV उद्योग के राजा हैं। फिलहाल इस दौड़ में चीन सबसे आगे है।


चीन का लिथियम साम्राज्य

चीन ने पिछले दो दशकों में लिथियम सप्लाई चेन पर गहरी पकड़ बना ली है। चाहे खनन हो, रिफाइनिंग हो या बैटरी निर्माण—हर स्तर पर चीन की मौजूदगी है।

दुनिया की लगभग 70% लिथियम प्रोसेसिंग क्षमता चीन के पास है। यही वजह है कि अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे देश चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।


भारत की चुनौती: बढ़ती EV मांग, सीमित संसाधन

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है और सरकार 2030 तक EV को बड़े पैमाने पर अपनाने का लक्ष्य रखती है।

लेकिन समस्या यह है कि भारत के पास लंबे समय तक लिथियम के ज्ञात भंडार नहीं थे, जिससे उसे पूरी तरह आयात पर निर्भर रहना पड़ता था।


भारत में लिथियम की खोज: एक बड़ा मोड़

2023 में जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले में लिथियम भंडार की खोज ने भारत की रणनीति को नया मोड़ दिया।

हालाँकि ये भंडार कितने व्यावसायिक रूप से उपयोगी होंगे, इस पर अभी अध्ययन जारी है, लेकिन यह खोज भारत के लिए रणनीतिक आत्मविश्वास लेकर आई।


घरेलू खनन की चुनौतियाँ

लिथियम खनन आसान नहीं है। इसके लिए:

  • भारी निवेश
  • पर्यावरणीय अनुमति
  • स्थानीय समुदायों की सहमति
  • उन्नत तकनीक

की आवश्यकता होती है। भारत में खनन नियम और पर्यावरणीय चिंताएँ इस प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं।


पर्यावरण बनाम विकास की बहस

लिथियम खनन में पानी की भारी खपत होती है, जो पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकती है।

भारत जैसे जल-संकटग्रस्त देश में यह सवाल बेहद गंभीर है कि क्या EV क्रांति पर्यावरण की कीमत पर होनी चाहिए?


अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भारत की चाल

घरेलू संसाधनों के साथ-साथ भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लिथियम सुरक्षित करने की रणनीति बनाई है।

भारत ने:

  • ऑस्ट्रेलिया
  • अर्जेंटीना
  • चिली
  • बोलीविया

जैसे लिथियम-समृद्ध देशों से साझेदारी बढ़ाई है।


लिथियम ट्रायंगल और भारत की नजर

दक्षिण अमेरिका का Lithium Triangle (चिली, अर्जेंटीना, बोलीविया) दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडार रखता है।

भारत ने इन देशों में निवेश और खनन अधिकारों के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज़ किए हैं।


KABIL: भारत का रणनीतिक हथियार

भारत सरकार ने KABIL (Khanij Bidesh India Limited) नाम की कंपनी बनाई है, जिसका उद्देश्य विदेशों में खनिज संसाधनों को सुरक्षित करना है।

यह कंपनी भारत के लिए लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का माध्यम बन रही है।


बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता

लिथियम सिर्फ खनन से नहीं, बल्कि बैटरी निर्माण से असली मूल्य पैदा करता है।

भारत में अब:

  • गीगाफैक्ट्री परियोजनाएँ
  • PLI स्कीम
  • घरेलू सेल मैन्युफैक्चरिंग

पर ज़ोर दिया जा रहा है।


क्या भारत चीन को टक्कर दे पाएगा

चीन की तुलना में भारत अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन भारत के पास:

  • बड़ा घरेलू बाजार
  • सस्ती श्रम शक्ति
  • तकनीकी प्रतिभा

जैसे मजबूत पक्ष हैं।


बैटरी रीसाइक्लिंग: छुपा हुआ हथियार

भारत बैटरी रीसाइक्लिंग पर भी काम कर रहा है, जिससे इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों से लिथियम दोबारा निकाला जा सके।

यह रणनीति आयात निर्भरता को कम कर सकती है।


लिथियम और राष्ट्रीय सुरक्षा

भविष्य में लिथियम सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन सकता है।

जिस देश के पास लिथियम सप्लाई होगी, वही:

  • सैन्य ड्रोन
  • इलेक्ट्रिक आर्मी व्हीकल
  • ऊर्जा भंडारण

पर नियंत्रण रखेगा।


EV बैटरी की अगली पीढ़ी

भारत लिथियम के साथ-साथ:

  • सोडियम-आयन बैटरी
  • सॉलिड-स्टेट बैटरी

जैसी तकनीकों पर भी निवेश कर रहा है, ताकि भविष्य में विकल्प मौजूद रहें।


भारत के लिए यह सिर्फ खनिज नहीं

लिथियम भारत के लिए सिर्फ एक धातु नहीं है, बल्कि यह:

  • ऊर्जा सुरक्षा
  • तकनीकी स्वतंत्रता
  • आर्थिक शक्ति

का प्रतीक बनता जा रहा है।


वैश्विक राजनीति में नई धुरी

जिस तरह 20वीं सदी में तेल ने राजनीति को बदला, उसी तरह 21वीं सदी में लिथियम वैश्विक समीकरण बदल सकता है।

भारत इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहता है—अनुयायी नहीं, बल्कि नेता के रूप में।


निष्कर्ष: लिथियम की जंग और भारत का भविष्य

लिथियम की जियोपॉलिटिक्स एक लंबी और जटिल लड़ाई है। भारत के सामने चुनौतियाँ भी हैं और अवसर भी।

अगर सही नीति, पर्यावरणीय संतुलन और तकनीकी निवेश किया गया, तो भारत EV बैटरी के क्षेत्र में वैश्विक ताकत बन सकता है।

यह सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों की कहानी नहीं हैयह भारत के भविष्य की कहानी है।

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