पहला देश जिसने समुद्र में खोया अपना पहला शहर 🌊
दुनिया में कई देश जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के कारण संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता उन कुछ शहरों में से एक है जो समुद्र में डूबने की कगार पर है। यह दुनिया का पहला बड़ा शहर बन सकता है जो पानी में समा जाएगा।
जकार्ता क्यों डूब रहा है?
जकार्ता, जो इंडोनेशिया की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है, तेजी से डूब रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह शहर हर साल लगभग 10 इंच तक डूबता जा रहा है। इसके कई कारण हैं:
- भूजल का अत्यधिक दोहन – शहर के अधिकांश हिस्सों में पीने और अन्य उपयोगों के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है, जिससे भूमि धंसती जा रही है।
- समुद्री जल स्तर में वृद्धि – जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे तटीय शहरों को खतरा है।
- बुनियादी ढांचे का भार – शहर में अत्यधिक जनसंख्या और भारी बुनियादी ढांचा भी ज़मीन के बैठने का एक बड़ा कारण है।
- कमज़ोर जल निकासी प्रणाली – शहर में उचित जल निकासी प्रणाली का अभाव है, जिससे बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
इंडोनेशिया की सरकार का समाधान
इंडोनेशिया की सरकार ने जकार्ता की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए राजधानी को स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।
- नई राजधानी नुसांतारा – सरकार ने घोषणा की है कि वह बोर्नियो द्वीप पर एक नया शहर, नुसांतारा, बसाने जा रही है, जो 2024 से 2045 तक के चरणों में विकसित किया जाएगा।
- सतत विकास पर जोर – नई राजधानी को पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनाया जा रहा है।
- विकेंद्रित प्रशासन – सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों का भी विकास हो, जिससे जनसंख्या का दबाव कम किया जा सके।
क्या यह पहला उदाहरण है?
यह पहली बार नहीं है जब कोई शहर समुद्र में डूबने की कगार पर है। दुनिया के कई अन्य तटीय शहरों को भी इस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए:
- वेनिस, इटली – यह ऐतिहासिक शहर भी धीरे-धीरे पानी में डूब रहा है।
- मालदीव द्वीपसमूह – समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण इस देश का अस्तित्व भी खतरे में है।
- शंघाई, चीन – यह शहर भी जकार्ता की तरह भूमि धंसने की समस्या से जूझ रहा है।
क्या जकार्ता का भविष्य अंधकारमय है?
भले ही सरकार ने नई राजधानी बसाने का निर्णय लिया है, लेकिन यह तय नहीं है कि जकार्ता पूरी तरह से समुद्र में समा जाएगा। यदि सही कदम उठाए गए तो इस ऐतिहासिक शहर को बचाया जा सकता है।
निष्कर्ष
इंडोनेशिया का यह ऐतिहासिक फैसला दर्शाता है कि जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के प्रभावों से निपटने के लिए हमें सक्रिय कदम उठाने होंगे। न केवल जकार्ता, बल्कि अन्य तटीय शहरों को भी इससे सीख लेकर सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करना चाहिए। 🌍✨