The First Country to Introduce Internet Voting: Estonia

The First Country to Introduce Internet Voting - Estonia

एस्टोनिया: इंटरनेट वोटिंग शुरू करने वाला दुनिया का पहला देश

प्रस्तावना

आज के डिजिटल युग में तकनीक ने जीवन के हर क्षेत्र को बदल दिया है। संचार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य—हर जगह डिजिटल क्रांति दिखाई देती है। लेकिन सबसे रोचक और ऐतिहासिक बदलाव लोकतंत्र की मूल प्रक्रिया मतदान में आया है।

पारंपरिक मतदान में लोग मतदान केंद्र पर जाकर पहचान पत्र दिखाते हैं और बैलेट बॉक्स में वोट डालते हैं। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और कई बार असुविधाजनक होती है। लेकिन 2005 में यूरोप का छोटा सा बाल्टिक देश एस्टोनिया ने इतिहास रच दिया। उसने दुनिया का पहला देश बनकर राष्ट्रीय चुनावों में इंटरनेट वोटिंग (वोटिंग) लागू की।

वोटिंग का महत्व

ई‑वोटिंग का अर्थ है कि नागरिक इंटरनेट के माध्यम से सुरक्षित तरीके से अपने मत डाल सकते हैं। इसका महत्व कई कारणों से है:

  • सुलभता: बुजुर्ग, दिव्यांग और विदेश में रहने वाले नागरिक आसानी से वोट कर सकते हैं।
  • सुविधा: न कतारें, न टिकट, न इंतज़ार।
  • तेज़ी: वोट गिनने की प्रक्रिया तेज़ होती है।
  • सुरक्षा: डिजिटल आईडी सिस्टम से वोट की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है।
  • भविष्य की तैयारी: जैसे‑जैसे समाज डिजिटल हो रहा है, ई‑वोटिंग आधुनिक जीवनशैली से मेल खाती है।

एस्टोनिया की वोटिंग प्रणाली कैसे काम करती है

एस्टोनिया की ई‑वोटिंग प्रणाली उसकी राष्ट्रीय डिजिटल पहचान (ID Card) पर आधारित है। हर नागरिक के पास स्मार्ट आईडी कार्ड या मोबाइल‑आईडी होता है।

प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. प्रमाणीकरण: नागरिक अपने आईडी कार्ड और पिन कोड से लॉगिन करते हैं।
  2. मतदान: सुरक्षित कनेक्शन के माध्यम से उम्मीदवार चुनते हैं।
  3. एन्क्रिप्शन: वोट को एन्क्रिप्ट किया जाता है ताकि गोपनीयता बनी रहे।
  4. सत्यापन: नागरिक यह जांच सकते हैं कि उनका वोट सही दर्ज हुआ है।
  5. लचीलापन: यदि मतदाता अपना निर्णय बदलना चाहें तो पुनः वोट कर सकते हैं। अंतिम वोट ही मान्य होता है।
  6. ऑडिट: स्वतंत्र पर्यवेक्षक सिस्टम की निष्पक्षता की जांच कर सकते हैं।

क्यों एस्टोनिया पहला देश बना

  • छोटी जनसंख्या: लगभग 13 लाख नागरिकों के कारण सिस्टम लागू करना आसान था।
  • डिजिटल समाज: एस्टोनिया पहले से ही ई‑गवर्नेंस में अग्रणी था।
  • राजनीतिक इच्छाशक्ति: सरकार ने डिजिटल परिवर्तन को राष्ट्रीय रणनीति बनाया।
  • विश्वास: नागरिकों का संस्थानों और डिजिटल सिस्टम पर भरोसा था।
  • नवाचार संस्कृति: एस्टोनिया ने पहले भी ई‑रेज़िडेंसी और ब्लॉकचेन गवर्नेंस जैसे प्रयोग किए थे।

लोकतंत्र पर प्रभाव

एस्टोनिया की ई‑वोटिंग प्रणाली ने कई सकारात्मक बदलाव किए:

  • भागीदारी बढ़ी: विदेश में रहने वाले नागरिक भी आसानी से वोट कर पाए।
  • युवा जुड़ाव: तकनीक‑प्रेमी युवाओं ने अधिक मतदान किया।
  • तेज़ परिणाम: चुनाव परिणाम जल्दी घोषित हुए।
  • वैश्विक पहचान: एस्टोनिया डिजिटल लोकतंत्र का अग्रणी देश बन गया।

2023 के संसदीय चुनावों में पहली बार 51% से अधिक वोट ऑनलाइन डाले गए, जो पारंपरिक बैलेट से ज़्यादा थे।

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ

हालाँकि ई‑वोटिंग के साथ कुछ चिंताएँ भी जुड़ी हैं:

  • साइबर सुरक्षा: हैकिंग का खतरा हमेशा बना रहता है।
  • पारदर्शिता: कुछ लोग मानते हैं कि पेपर बैलेट अधिक भरोसेमंद हैं।
  • डिजिटल विभाजन: हर नागरिक के पास समान तकनीकी सुविधा नहीं होती।
  • विश्वास का सवाल: आलोचकों का कहना है कि सिस्टम को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना कठिन है।

एस्टोनिया ने इन चुनौतियों का समाधान किया:

  • एंड‑टू‑एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग।
  • वोट सत्यापन ऐप्स उपलब्ध कराए।
  • स्वतंत्र ऑडिट की अनुमति।
  • पारंपरिक पेपर वोटिंग का विकल्प बरकरार रखा।

वोटिंग से आगे एस्टोनिया का डिजिटल लोकतंत्र

एस्टोनिया ने केवल ई‑वोटिंग ही नहीं, बल्कि कई डिजिटल सेवाएँ लागू की हैं:

  • रेज़िडेंसी: विदेशी उद्यमी ऑनलाइन कंपनी पंजीकृत कर सकते हैं।
  • डिजिटल स्वास्थ्य सेवा: नागरिक ऑनलाइन मेडिकल रिकॉर्ड देख सकते हैं।
  • ऑनलाइन टैक्सेशन: टैक्स फाइलिंग कुछ ही मिनटों में हो जाती है।
  • ब्लॉकचेन गवर्नेंस: सार्वजनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन का उपयोग।

अन्य देशों के लिए प्रेरणा

एस्टोनिया का मॉडल कई देशों के लिए प्रेरणादायक बना:

  • स्विट्ज़रलैंड: कुछ कैंटन में ई‑वोटिंग का प्रयोग हुआ।
  • कनाडा: नगर चुनावों में ऑनलाइन वोटिंग की कोशिश की गई।
  • भारत: प्रवासी भारतीयों के लिए डिजिटल समाधान पर विचार हो रहा है।

हालाँकि हर देश की जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और तकनीकी ढाँचा अलग है, इसलिए एस्टोनिया जैसा मॉडल तुरंत लागू करना संभव नहीं।

निष्कर्ष

एस्टोनिया ने यह साबित कर दिया कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति और तकनीकी सुरक्षा हो, तो इंटरनेट वोटिंग भविष्य की चुनाव प्रणाली बन सकती है। यह नागरिकों के लिए सुविधाजनक है और लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाता है।

एस्टोनिया का यह प्रयोग दुनिया को यह संदेश देता है कि लोकतंत्र केवल बैलेट बॉक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में यह और भी सुलभ और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।

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