आईटीसी होटल्स का बीएसई और एनएसई से हटना: क्या है पूरा मामला?
आईटीसी लिमिटेड से डिमर्जर (विभाजन) के बाद, आईटीसी होटल्स को 29 जनवरी 2025 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध किया गया था। शुरुआत में, कंपनी को अस्थायी रूप से बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 जैसे प्रमुख सूचकांकों में शामिल किया गया था, ताकि पैसिव फंड्स (निष्क्रिय निवेश कोष) अपने पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित कर सकें।
हालांकि, डिमर्जर के बाद सूचीबद्ध कंपनियों के लिए मानक प्रक्रिया के अनुसार, आईटीसी होटल्स को तीन कारोबारी दिनों के बाद, यानी 1 फरवरी 2025 से इन सूचकांकों से हटा दिया गया। यह निर्णय लिया गया ताकि इंडेक्स फंड्स और अन्य निष्क्रिय निवेश वाहन (Passive Investment Vehicles) अपने पोर्टफोलियो को समायोजित कर सकें।
अपने पहले ट्रेडिंग सत्र में, आईटीसी होटल्स के शेयरों में गिरावट देखी गई। शेयर की शुरुआत ₹180 पर हुई और दिन के अंत में यह ₹176 पर बंद हुआ, जिससे कंपनी का कुल मूल्यांकन लगभग ₹36,620 करोड़ ($4.23 बिलियन) हो गया। यह गिरावट मुख्य रूप से पैसिव फंड्स द्वारा पोर्टफोलियो समायोजन के लिए की गई बिकवाली के कारण हुई, क्योंकि इसे प्रमुख सूचकांकों से हटा दिया गया था।
यह ध्यान देने योग्य है कि इस तरह के सूचकांक समायोजन डिमर्जर और नई सूचीबद्ध कंपनियों के लिए एक नियमित प्रक्रिया होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सूचकांक बाजार का सटीक प्रतिनिधित्व करें और पहले से निर्धारित मानदंडों का पालन करें।